रूपक क्या है? (What is a Metaphor?)

Shaksham Sir
Shaksham Sir

 रूपक हिंदी (और संस्कृत) साहित्य का एक अत्यंत शक्तिशाली अलंकार है। अक्सर इसे उपमा का गहन रूप कहा जाता है। अंतर यह है: उपमा में कहते हैं 'यह उसके समान है', जबकि रूपक में कहते हैं 'यह वही है'।


दूसरे शब्दों में, उपमा में उपमेय और उपमान अलग रहते हैं, पर रूपक में उनका अभेद (एकरूप) बता दिया जाता है। उपमा का वाचक शब्द 'समान', 'सा', 'जैसा' रूपक में गायब हो जाता है, और उपमान सीधे उपमेय पर आरोपित कर दिया जाता है।




उदाहरण से समझें:


· उपमा: "चेहरा चंद्रमा के समान सुंदर है।"

· रूपक: "चेहरा ही चंद्रमा है।"


रूपक के दो अंग होते हैं—उपमेय और रूपक (जो उपमान का ही दूसरा नाम है)। जैसे: "जीवन पथ पर चलते हुए" — यहाँ 'जीवन' उपमेय है, 'पथ' रूपक (उपमान) है। हम जीवन को सड़क बता रहे हैं।


रूपक का प्रभाव सीधे मन पर पड़ता है। "मोहब्बत एक जंग है" कहने से प्रेम का संघर्षमय पक्ष तुरंत सामने आ जाता है। "समय चोर है" कहने से समय की चुराने वाली प्रकृति बिना किसी व्याख्या के समझ आ जाती है।


हिंदी कविता में रूपक का सर्वोत्तम उदाहरण मिलता है जयशंकर प्रसाद के यहाँ: "तिमिर ने ज्यों ही सिर उठाया, किरण ने उस पर प्रहार किया।" अंधकार और रोशनी को व्यक्तियों की तरह प्रस्तुत किया गया है।


निराला लिखते हैं: "बादलों का घेरा, विद्युत की ज्वाला।" बादलों को सेना का घेरा, बिजली को आग बता देना रूपक है।


आधुनिक प्रयोग: "शब्दों की तलवार लेकर उतरा लेखक।" लेखक को योद्धा मान लिया गया। रूपक सीखने का सबसे सरल तरीका है—तुलना करते समय 'जैसा' हटा दो, और जोड़ो 'है' से। अभ्यास से रूपक लिखना कविता का महत्वपूर्ण कौशल बन जाता है।

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