कविता क्या है? (What is a Poem?)

Shaksham Sir
Shaksham Sir


 कविता साहित्य की वह विधा है जो मानवीय भावनाओं, अनुभूतियों और कल्पनाओं को लय, छंद और चित्रात्मकता के माध्यम से अभिव्यक्त करती है। यह हृदय की भाषा है, बुद्धि की नहीं।


कविता का जन्म मन के किसी गहरे आवेग से होता है—चाहे वह प्रेम हो, करुणा हो, वीरता हो या विरह। सामान्य गद्य की तरह कविता केवल सूचना नहीं देती, बल्कि अनुभव कराती है। जब हम कविता पढ़ते हैं तो शब्द हमारे भीतर रंग, गंध, ध्वनि और स्पर्श पैदा करते हैं।


कविता की दो अनिवार्य विशेषताएँ हैं—लय और प्रतीकात्मकता। लय शब्दों के उच्चारण के एक विशेष क्रम से बनती है, जो प्रायः छंद से नियंत्रित होती है। प्रतीकात्मकता का अर्थ है कि कविता सीधा अर्थ न कहकर, बिंबों और प्रतीकों के माध्यम से व्यंजना करती है। उदाहरण के लिए, 'आँखों में पानी' का सीधा अर्थ आँसू है, लेकिन कविता में यह दुख, अपराधबोध या करुणा का प्रतीक बन जाता है।


कविता के प्रकार भी विविध हैं—गीत (जिसे गाया जा सके), गज़ल (उर्दू परंपरा की प्रेम कविता), मुक्तक (बिना छंद की कविता), मुक्त छंद (लय तो हो पर छंद के बिना), हाइकू (जापानी लघु कविता) आदि।


हिंदी में कबीर के दोहे, तुलसी के चौपाइयाँ, सूर के पद, मीरा के भजन, निराला के 'राम की शक्ति-पूजा', महादेवी वर्मा के गीत, मुक्तिबोध की ब्रह्मराक्षस-शैली—ये सब कविता के विभिन्न चेहरे हैं।


सारांश यह कि कविता मन की उस भूमि पर उगने वाला फूल है, जहाँ तर्क की जुताई नहीं होती। वह कहती है कम, पर दिखाती है बहुत। इसीलिए कविता पढ़ना केवल शब्द पढ़ना नहीं, अपने भीतर की किसी अनकही धड़कन को सुनना है।

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